पहले मैं साहित्यिक क्षेत्र की बात करते हुए यह बताना चाहूंगा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं उस परिवार से आता हूँ जिसने न सिर्फ हिंदी साहित्य की सेवा के क्षेत्र में भारत का मान ,सम्मान व गौरव सारे विश्व में बढ़ाया बल्कि अंग्रेजी शासन काल में भी हिंदी के उन्नयन एवं विकास के लिए अविस्मरणीय कार्य किया | मुझे यह बताते हुए अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है कि मेरे पूर्वज लाला बृज मोहन लाल भल्ला एक समृद्ध बैंकर होने के साथ -साथ हिंदी के अनन्य सेवक भी थे | उन्होंने इलाहाबाद लाल डिग्गी स्थित अपने निवास में ही हिंदी के एक पुस्तकालय की भी स्थापना की थी | लाला बृज मोहन लाल भल्ला के पड़ोस में ही प्रखर राष्ट्रवादी एवं हिंदी के प्रबल समर्थक पंडित मदन मोहन मालवीय जी भी निवास करते थे | मेरे पूर्वज लाला बृज मोहन लाल भल्ला पंडित मदन मोहन मालवीय जी को पुत्रवत स्नेह करते थे व हिंदी सेवा के क्षेत्र में उनके प्रबल समर्थक व सहयोगी भी थे | वर्ष 1889 में लाला बृज मोहन लाल भल्ला ने पंडित मदन मोहन मालवीय एवं बाल कृष्ण भट्ट की सलाह पर अपने निवास स्थान पर संचालित अस्थायी पुस्तकालय को स्थायी रूप से एक भव्य ईमारत बनाकर संचालित करने का निश्चय किया | इसके लिए मेरे पूर्वज लाला बृज मोहन लाल भल्ला ने रूपए 47 200 /- की धनराशि से एक ट्रस्ट बनाकर विशिष्ट – वास्तुकला के आधार पर पुस्तकालय के लिए एक भव्य ईमारत बनाने हेतु ” भारती भवन पुस्तकालय ” की नीव रखी | पंडित मदन मोहन मालवीय जी कि स्मृति में कालांतर में इस मोहल्ले का नाम बदलकर मालवीय नगर कर दिया गया | लाला बृज मोहन लाल भल्ला के सहयोग से स्थापित भारती भवन पुस्तकालय पिछले 129 वर्षो से आज भी भारत की शान है |
मेरे पिता स्वर्गीय राधेश्याम भल्ला जी उत्तर प्रदेश सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारी होने के साथ -साथ हिंदी के एक विख्यात कवि एवं लेखक भी थे जिनके दो काव्य संग्रह “स्वप्न और आंसू ” तथा “आंसू और उल्लास ” अत्यंत लोकप्रिय रहे | मेरे ताऊ स्वर्गीय श्री मोती लाल भल्ला जी भी लेखन के क्षेत्र में विख्यात थे | उनके द्वारा रचित ” लाओसीएन भाषा डायरेक्टरी ” तथा ” शॉर्टहैंड डायरेक्टरी ” के विशिष्ट प्रकाशन के लिए उनका नाम ” लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ” में शामिल किया गया था |
विरासत में मिले अपने पैतृक गुणों के फलस्वरूप ही मैंने वर्ष 1995 में लखनऊ से सांसद माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रेरणा से भारतीय जनता पार्टी के विचारों , नीतियों व कार्यक्रमों को जन-जन एक पहुँचाने के लिए एक मासिक समाचार पत्र “विशिष्ट भारत “का प्रकाशन व सम्पादन प्रारम्भ किया | जिसका विमोचन माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने लखनऊ में अपने कर – कमलो से करते हुए इस कार्य की अत्यंत सराहना व प्रशंसा की थी | वर्ष 2002 में मैंने अपनी संस्था लखनऊ अवार्ड काउन्सिल द्वारा प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की उपलब्धियों के लिए विश्व के विशालतम एक किलोमीटर ( 1000 मीटर ) लम्बे 400 किलोग्राम वजन के हस्तलिखित “अभिनन्दन -पत्र ” से 23 दिसम्बर 2002 को उनके जन्म दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री निवास 7 रेस कोर्स रोड नई दिल्ली में तत्कालीन नगर विकास मंत्री श्री लाल जी टंडन जी के नेतृत्व में एक भव्य समारोह का आयोजन कर उन्हें सम्मानित किया था | इस अनमोल भेंट को ग्रहण करते हुए माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मुझको आशीर्वाद देते हुए यह कहा था , ” कलम का ऐसा विलक्षण प्रयोग जारी रखियेगा ” |
अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रियता के दौरान मैंने यह महसूस किया की जीवन में बहुत सारे लोग अपने विशिष्ट कार्यों में बड़ी तल्लीनता से लगे हुए हैं परन्तु उनके बारे में उनके शहर के लोग ही नहीं जानते हैं | अतः मैंने ऐसी विशिष्ट प्रतिभाओं को एवार्ड प्रदान कर सम्मानित करने का निश्चय किया | फलस्वरूप अपनी संस्था लखनऊ एवार्ड काउन्सिल के द्वारा वर्ष 1997 से सम्मान समारोह का आयोजन प्रारम्भ किया गया | वर्ष 1999 में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मान समारोह में पधारे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल माननीय श्री सूरजभान जी ने अपने सम्बोधन में आशीर्वाद प्रदान करते हुए यह कहा था ” जो ज्योति आपने जलाई है, उसकी लौ कभी धीमी नहीं होनी चाहिए ” | इन्ही पंक्तियों से प्रेरित होकर वर्ष 1997 से 2015 तक लगभग 300 विशिष्ट हस्तियों को एवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया | मुझे यह बताते हुए हर्ष का अनुभव हो रहा है कि अपने क्षेत्र की इन विशिष्ट हस्तियों में से लगभग 6 हस्तियों को बाद में भारत सरकार ने ” पदम् श्री ” पुरुस्कार से सम्मानित किया | यह मेरी संस्थाओं लखनऊ एवार्ड काउन्सिल ,उत्तर प्रदेश एवार्ड सोसाइटी व एवार्ड काउन्सिल ऑफ़ इंडिया के लिए गौरव का विषय है |
इन 18 वर्षो के सम्मान समारोहों में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों में तत्कालीन राज्यपाल उत्तर प्रदेश माननीय श्री सूरजभान जी, माननीय राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्री विष्णु कांत शास्त्री जी तथा उत्तर प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल माननीय श्री राम नाईक जी, तत्कालीन नगर विकास मंत्री श्री लाल जी टंडन जी तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी प्रमुख हैं | जिन्होंने अपने कर कमलो द्वारा अपने – अपने क्षेत्र की जिन विशिष्ट हस्तियों को एवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया उनमें लोकप्रिय जनसेवक माननीय श्री लाल जी टंडन जी , विख्यात हृदय रोग चिकित्सक डॉ. नरेश त्रेहन जी ,विख्यात पर्यावरणविद व सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक जी , विख्यात संगीतकार स्व. श्री नौशाद जी , विख्यात भजन गायक श्री अनूप जलोटा जी ,विख्यात लेखिका स्व. शिवानी जी , विख्यात पत्रकार राहुल देव जी , विख्यात चिकित्सक व लखनऊ के नगर प्रमुख स्व. डॉ. एस. सी .राय जी , विख्यात व्यंगकार स्व. के .पी. सक्सेना जी ,विख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी जी, विख्यात भजन गायक अग्निहोत्री बन्धु, वरिष्ठ महिला आई. ए. एस .अधिकारी श्रीमती अनीता भटनागर जैन जी ,कबीर शांति मिशन के संयोजक श्री राकेश कुमार मित्तल जी , सुप्रसिद्ध गायिका सुरभि रंजन जी आदि प्रमुख हैं |
एवार्ड समारोहों की इसी श्रृंखला में देश के कोने -कोने से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे अनमोल हीरों को ढूंढकर देश के सामने एक स्थान पर एक प्रेरणा स्रोत के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मेरे द्वारा स्थापित रजिस्टर्ड ट्रस्ट एवार्ड काउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने विश्व के प्रथम ऑनलाइन एवार्ड पोर्टल www.awardcouncilofindia.com का शुभारम्भ किया | जिसके द्वारा विश्वविख्यात समाजसेवी डॉ. मधु कृष्ण जी को ” प्राइड ऑफ़ इंडिया एवार्ड ” से सम्मानित किया गया | इस एवार्ड पोर्टल के द्वारा हम भारत के समस्त राज्योँ से विभिन्न क्षेत्रों की विलक्षण प्रतिभाओं को देश के सम्मुख प्रदर्शित कर सम्मानित करते रहेंगे |
उपरोक्त विवरण मेरी जीवन – यात्रा की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धियोँ की एक झलक मात्र हैं | यात्रा निरंतर जारी है , अभी और भी महत्वपूर्ण पड़ाव आने शेष हैं | हमें विश्वास है कि आने वाले समय के वे अविस्मरणीय पल हमारे जीवन में अनेकों नए सुनहरे पन्ने जोड़ेंगे | ईश्वरप्रदत्त योग्यता से राष्ट्र और समाज की सेवा करता रहूं , यह मेरा सौभाग्य होगा |
( डॉ० सुभाष भल्ला )
प्रधान संपादक